
जितेन्द्र सिंह
देश में कोरोना वायरस को लेकर चौंकाने वाली जानकारी हाथ लगी है. गुजरात के अहमदाबाद में साबरमती के साथ ही कांकरिया,और चण्डोला तालाब से लिए गए सैंपल में भी कोरोना वायरस की पुष्टि हुई है. नदियों के पानी में कोरोना वायरस संक्रमण को लेकर आईआईटी गांधी नगर सहित देश के आठ संस्थानों ने शोध किया है. इस शोध में नई दिल्ली स्थित जेएनयू के स्कूल ऑफ इनवॉयरमेंटल साइंसेज के शोद्यार्थी भी शामिल हैं. गांधीनगर स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के पृथ्वी विज्ञान विभाग के मनीष कुमार ने बताया अभी तक केवल सीवेज लाइन में ही कोरोना वायरस के जीवित होने की पुष्टि हुई थी.
दुनियाभर में कोरोना वायरस (Coronavirus) के संक्रमण ने पिछले डेढ़ साल से कोहराम मचा रखा है. कोरोना वायरस को लेकर आए दिन कोई न कोई नई जानकारी मिलती रहती है. नई जानकारी के मुताबिक अभी तक देश के कई शहरों में सीवेज लाइन (Sewage Line) में कोरोना वायरस के जीवित मिलने की पुष्टि हुई थी लेकिन ऐसा पहली बार है अब प्राकृतिक जल स्त्रोत में भी कोरोना वायरस का पता चला है. गुजरात (Gujarat) के अहमदाबाद (Ahmedabad) में साबरमती नदी (Sabarmati River) में कोरोना वायरस की मौजूदगी का पता चला है. वैज्ञानिक इस बात को लेकर हैरान हैं कि यहां से लिए गए सभी सैंपल में कोरोना वायरस की पुष्टि हुई है.
दरअसल, कई सीवेज के सैंपल पॉजिटिव आने के बाद रिसर्चर ने साफ पानी के जलस्रोतों के रिसर्च की दिशा में काम शुरू किया था। अहमदाबाद में सबसे ज्यादा वेस्ट वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट हैं और गुवाहाटी में एक भी नहीं है। इसी के चलते रिसर्च के लिए इन दोनों शहरों को चुना गया था।
गांधीनगर स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के पृथ्वी विज्ञान विभाग के मनीष कुमार ने बताया की हमारी टीम ने जब नदी के पानी का सैंपल लिया और उसकी जांच की तो चौंकाने वाली जानकारी मिली. उन्होंने बताया कि उनकी टीम ने 3 सितंबर से 29 दिसंबर 2020 तक हर सप्ताह नदियों के सैंपल लिए थे. साबरमति से 694, कांकरिया से 549 और चंदोला से 402 सैंपल लिए गए थे. शोध में सभी सैंपल में कोरोना की पुष्टि हुई है. पिछले वर्ष सीवेज से सैंपल लेकर जांच के दौरान कोरोना वायरस की मौजूदगी का पता चला था। हलाकि ये डेड वायरस मिले है लेकिन इन डेड वायरस ने भी शोधकर्ताओं को सोचने पर मजबूर कर दिया है
वही अहमदाबाद मेडिकल एसोसिएशन भी इस स्टडी को गंभीरता लेकर विचार करने को मजबूर हो गया है , एसोसिएशन की पूर्व प्रेजिडेंट और सदस्य डॉ मोना देसाई की माने तो देश के सभी प्राकृतिक जल स्त्रोत की जांच होनी चाहिए क्योंकि दूसरी लहर में वायरस के कई गंभीर म्यूटेशन भी देखने को मिले हैं।
बहरहाल आपकी जानकारी के लिए बता दे साबरमती नदी उद्योगों के कचरे और सीवेज से हुई प्रदूषित रिवरफ्रंट को लेकर यह भी दावे किए जाते हैं कि इसकी वजह से नदी का पानी प्रदूषित होने से बचाया जा सकता है। जबकि, रिसर्च में पता चला कि नदी बहुत अधिक प्रदूषित है। वहीं, करीब 120 किमी के इलाके में तो साबरमती नदी मृत अवस्था में है। इसके कई सैंपल की जांच में पता चला कि नदी का पानी पीने लायक ही नहीं है। इसमें नरोडा, ओढव, वटवा और नारोल इलाके के उद्योगों का प्रदूषित कचरा (एफ्ल्यूएंट) और शहर के सीवेज का पानी मिल जाता है। इसी के चलते शहर के बीच से बहने के बाद भी अहमदाबाद के लोगों को नर्मदा के पानी पर ही निर्भर रहना पड़ता है। यही हाल शहर के कांकरिया और चंडोला तालाब का भी है।















