गजेन्द्र राम त्रिपाठी, खजनी, गोरखपुर
*जलनिकासी की समस्या से जूझ रहा है नगर पंचायत*
उनवल।मार्च 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने प्राकृतिक जलाशयों (तालाबों) के संरक्षण का आदेश दिया था।जो कि शासनदेश बन गया। वहीं इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश भर के तालाबों को अतिक्रमण से मुक्त कराकर बहाल करने को लेकर नवंबर 2019 में कड़ा आदेश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि प्रदेश में 1951-52 के राजस्व अभिलेखों में दर्ज तालाबों से अतिक्रमण हटाकर उन पर दिए गए पट्टे समाप्त किए जाएं और तालाबों को पूर्व की स्थिति में बहाल किया जाए।
जीवन के लिए जरूरी पेयजल और बढ़ती जनसंख्या तथा 20 रूपए लीटर बिकने वाले शुद्ध पेयजल खरीदने के बावजूद प्रशासन और स्थानीय नगर निकायों द्वारा जल संरक्षण के लिए प्राकृतिक जलस्रोतों के संरक्षण पर उदासीनता बनी हुई है। जमीन की बढ़ती कीमतों और जलाशयों पर अतिक्रमण को आसान समझ कर लोग जानबूझकर तालाबों की भूमि पर अवैद्य कब्जा करने में लगे हुए हैं, और प्रशासन मूक दर्शक बना हुआ है। इस बीच प्रदेश सरकार द्वारा जल संरक्षण के लिए नए जलाशयों (तालाबों) के निर्माण की योजना भी चलाई गई है। लेकिन बावजूद इसके पुराने तालाबों पर अतिक्रमण रूकने का नाम नहीं ले रहा है।
सिर्फ खजनी तहसील क्षेत्र के कस्बा संग्रामसपुर उर्फ उनवल नगर पंचायत को ही लें तो यहां के राजस्व अभिलेखों में दर्ज कुल 37 तालाबों में दर्जनों अतिक्रमण का शिकार हैं। कुछ तालाबों का तो अस्तित्व ही खतरे में है।ऐसे में जल संचय और जल निकासी एक जटिल समस्या का रूप ले रही है।अगर यही हाल रहा तो नगर पंचायत में पेय जल की समस्या जटिल रूप ले लेगी।
क्या कहते है नगर पंचायत के लोग—
अजय कुमार वर्मा (नगरपंचायत उनवल)ने बताया कि नगर पंचायत में तो पोखरे बहुत है लेकिन बहुत पर अतिक्रमण के चलते पोखरे अस्तित्व विहीन हो रहे है।जिसके कारण जल निकासी की समस्या जटिल हो गई है और यही स्थिति रही तो भविष्य में पेयजल की समस्या भी बढ़ जाएगी

अमन निगम (नगर पंचायत उनवल)ने बताया कस्बे में अतिक्रमण की समस्या बहुत जटिल है,रोड से लेकर पोखरों तक अतिक्रमण भारी मात्रा में हुआ जा रहा है जिसका दुष्परिणाम भविष्य में हम लोगों को भुगतना पड़ेगा हम लोगों को जागरूक होकर स्वयं पोखरा और रोड को अतिक्रमण से बचने हेतू सहयोग करना चाहिये।

बैजनाथ प्रसाद(नगर पंचायत उनवल) का कहना है कि नगर प्रशासन जलाशयों और पोखरा के लिए कोई ध्यान नहीं दे रहा है अब तक किसी भी जलाशय का सुंदरीकरण और सफाई नहीं कराया गया है नगर प्रशासन को पोखरी का सुंदरीकरण करा कर खुदाई करवाना चाहिए ताकि जल संचय हो सके और पेयजल और जल निकासी की समस्या हम लोग की दूर हो सके।
क्या कहते है जिम्मेदार—-

इस संबंध में नगर पंचायत अधिशासी अधिकारी मनोज कुमार श्रीवास्तव का कहना है नगर पंचायत में 37 जलासय है चुनाव बाद उनको चिन्हित कराकर साफ कराया जायेगा,जिन पोखरों पर अतिक्रमण है उन्हें युद्व स्तर पर अभियान चला कर अतिक्रमण मुक्त करा कर जलसंचय व जलदोहन कराया जायेगा। और नगर पंचायत में तीन जलाशयों माया पोखरी, पावर हाउस के बगल की पोखरी व झारखंडी मंदिर की पोखरी को सुंदरीकरण के लिए भेजा गया है चुनाव बाद हो सकता है इस पर काम चालू हो जाए।















