
वर्तमान केंद्र व उत्तर प्रदेश सरकार क्षय रोग नियंत्रण का अभियान चला रही है। इसके अंतर्गत अनेक स्तरों पर प्रयास किये जा रहे है। योग, फिट इंडिया व सुपोषण जैसे अभियान भी स्वास्थ्य से ही संबंधित है। इन सभी के माध्यम से लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक भी किया जा रहा है। राज्यपाल आनन्दी बेन पटेल स्वयं भी इस अभियान में सहभागी है। उन्होंने एक अभिनव सेवा कार्य की शुरुआत की है। उनकी प्रेरणा से व्यक्तिगत व संस्थाओं के स्तर पर क्षय रोग से पीड़ित बच्चों को गोद लिया जा रहा है। इससे उनकी बेहतर देख रेख व नियमित दवा देना संभव हो रहा है। इसके साथ ही सुपोषण पर भी ध्यान दिया जा रहा है। आनन्दी बेन पटेल ने कहा कि विश्व में वर्ष 2030 तक क्षय रोग से मुक्ति का लक्ष्य रखा गया है। जबकि देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2025 तक भारत को टी.बी. मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा है। जिसके लिए हम सबको मिलकर कार्य करना होगा।

आनंदीबेन पटेल ने विश्व क्षय रोग दिवस पर विज्ञान भवन,नई दिल्ली में भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा आयोजित टी.बी. मुक्त भारत कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि राजभवन से ऑनलाइन प्रतिभागिता किया। उन्होंने कहा कि क्षय रोगी को दवा के साथ-साथ बेहतर पोषण की आवश्यकता भी होती है। सरकार पांच सौ रु प्रतिमाह रोगी के लिए देती है। लेकिन जानकारी के अभाव में तथा अन्य पारिवारिक स्थितियों के कारण वह पूरा पैसा क्षय रोग पीड़ित के लिए व्यय न होकर परिवार के दूसरे बच्चों पर भी खर्च हो जाता है। ऐसी स्थिति में बच्चे को उचित पोषण उपलब्ध कराने के लिए उन्होंने बच्चों के स्वस्थ होने तक गोद लेने का कार्य प्रारम्भ करवाया जिसके बेहतर परिणाम मिल रहे हैं। आनन्दी बेन की प्रेरणा से राजभवन द्वारा क्षय रोगियों को गोद लेने की पहल की गयी। राजभवन के अधिकारियों द्वारा क्षयरोग से ग्रसित इक्कीस बच्चों को गोद लिया गया। इस पहल को आगे बढ़ाते हुए प्रदेश भ्रमण के दौरान उन्होंने इसे अपने एजेंडे में शामिल किया। सभी शैक्षणिक संस्थानों, कॉरपोरेट जगत,टीबी एसोसिएशन,रेडक्रॉस सोसाइटी और समाज सेवी संगठनों से टीबी रोगियों को गोद लेने का आह्वान किया। जिसका सभी स्वयं सेवी संगठनों पर सकारात्मक प्रभाव हुआ। इन्होंने अपनी अपनी क्षमता के अनुसार टीबी रोगियों को गोद लिया। वर्ष 2021 में प्रदेश में लगभग चार लाख पचपन हजार क्षय रोगियों को चिन्हित कर उपचार एवं अन्य सुविधाएं प्रदान की गयीं। इस प्रकार प्रदेश में गत वर्ष टीबी के इलाज की सफलता दर बढ़कर चौरासी प्रतिशत हो गई है। राज्यपाल ने कहा कि स्वयं सेवी संगठन तथा राज्य विश्वविद्यालयों द्वारा रोगी को गोद लेना परिवार को भावनात्मक और पोषण संबंधी सहायता प्रदान करता है। उत्तर प्रदेश टी बी उन्मूलन की दिशा में तेजी से प्रगति कर रहा है।












