
योगी आदित्यनाथ सरकार को सुशासन पर अमल करने का चुनावी लाभ मिला। मतदाताओं ने विपक्ष के लोक लुभाव वादों पर विश्वास नहीं किया। कानून व्यवस्था की स्थापना सुशासन की पहली शर्त होती है। इसके बाद अन्य मुद्दे आते है। बेहतर कानून व्यवस्था कायम होने के बाद ही विकास योजनाओं का क्रियान्वयन सुनिश्चित होता है। तभी निवेश के लिए उद्योगपति आकर्षित होते है। सुशासन का क्षेत्र व्यपक होता है। इसमें कानून व्यवस्था,बिजली की पर्याप्त उपलब्धता,ईज ऑफ डूइंग,ईज ऑफ लिविंग,ढांचागत विकास,सड़कों का संजाल,कनेक्टिविटी आदि अनेक विषय शामिल होते है। इसके साथ ही आमजन से संवाद,उनकी समस्याओं का समाधान,सत्ता में बैठे लोगों की ईमानदारी व मेहनत का भी बहुत महत्व होता है। योगी आदित्यनाथ की कार्य व जीवन शैली में इस प्रकार की विशेषताएं समाहित है,जो सुशासन की स्थापना के लिए अपरिहार्य होती है। यदि नेतृत्व में इस प्रकार के गुण नहीं होते,तब वह इस उद्देश्य में सफल नहीं हो सकता। योगी सरकार के पहले उत्तर प्रदेश की राजनीति जाति मजहब के समीकरण पर चलती थी। यहां ऐसे दलों का वर्चस्व था,जिनका अस्तित्व ऐसे ही समीकरण पर आधारित रहता था। विकास और सुशासन यहां पर प्रभावी मुद्दा बन ही नहीं सका। यही कारण था कि बहुमत से सरकार बनाने वाली पार्टियां भी पांच वर्ष में अपनी चमक खो बैठती थी। सत्ता में वापसी की बात तो दूर ये पांच वर्ष में बहुमत से सिमट कर दहाई की संख्या में पहुंच जाती थी। उत्तर प्रदेश इसी प्रकार की राजनीति के लिए चर्चित रहता था। बिजली और खराब कानून व्यवस्था के चलते निवेशकों की उत्तर प्रदेश में कोई दिलचस्पी नहीं रह गई थी। पांच वर्ष पहले भाजपा को यहां बहुमत मिला।

योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री बनते ही उत्तर प्रदेश को परम्परागत राजनीति से बाहर निकाला। यहां जाति मजहब की जगह विकास प्रमुख मुद्दा बन गया। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश का परिदृश्य व तस्वीर भी बदलने लगी। विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में उत्तर प्रदेश का प्रदर्शन देश में सर्वाधिक शानदार होने लगा। उत्तर प्रदेश को यह नया स्वरूप देने में भाजपा को सफलता मिली। इसकी शुरुआत 2014 में हो चुकी थी। जब परिवार वाद व जातिवाद को नकारते हुए मतदाताओं ने राष्ट्रवाद को समर्थन देना शुरू किया। लोकसभा चुनाव में मतदाताओं ने राष्ट्रवाद को चुना। केंद्र में नरेंद्र मोदी ने बहुमत से सरकार बनाई थी। इसमें उत्तर प्रदेश का योगदान महत्वपूर्ण था। नरेंद्र मोदी स्वयं काशी से विजयी हुए थे। राष्ट्रवाद की जीत का यह क्रम 2017 के विधानसभा चुनाव में भी जारी रहा। उस समय सपा बसपा को दरकिनार करते हुए मतदाताओं ने भाजपा को बहुमत दिया था। योगी आदित्यनाथ पहली बार प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे। इस अवधि में सपा व कांग्रेस फिर सपा और बसपा का गठबंधन हुआ। लेकिन यह बेमेल गठबंधन के प्रयोग विफल रहे। 2019 के लोकसभा चुनाव में भी भाजपा ने बेमेल गठबंधन को बहुत पीछे छोड़ दिया था। अभी हुए विधानसभा चुनाव में भी भाजपा ने पूर्ण बहुमत से जनादेश प्राप्त किया। इस बार भी विपक्ष के नए प्रयोग विफल रहे। भाजपा सरकार में पांच वर्ष मंत्री रहे कतिपय अवसरवादियों ने पैंतरा बदला। मुख्यविपक्षी पार्टी में उनका स्वागत हुआ।

यह माना गया कि उनका समीकरण मजबूत हुआ है। महान शासक महाराज सुहेल देव के नाम पर राजनीति करने वालों ने भी नया प्रयोग किया। लेकिन ये सभी लोग सत्ता के करीब नहीं पहुंच चुके। भाजपा ने इस जनादेश को गहराई के साथ समझा है। छत्तीस वर्षों बाद उसने सुशासन के बल पर इतिहास बनाया है। इसके साथ ही सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को भी आमजन के समर्थन मिला है। काशी अयोध्या मथुरा इसके प्रतीक रहे है। इन सभी स्थानों पर भाजपा समर्थन मिला। सदियों बाद यहां अभूतपूर्व कार्य संपादित हुए। विपक्ष इन सभी विषयों को वोटबैंक सियासत की नजर से देखता रहा है। इस बार उन्होंने इन विषयों का नाम लेना शुरू किया। लेकिन उनकी पुरानी छवि इतनी गहरी रही है,की लोगों ने इस रूप परिवर्तन पर विश्वास नहीं किया। भाजपा सरकार ने सुशासन व संस्कृति राष्ट्रवाद की नीति पर दृढ़ता से अमल जारी रखने का मन बनाया है। योगी आदित्यनाथ का नेतृत्व इस कार्य को प्रभावी रूप में आगे बढ़ाएगा। इस समय एक पुस्तक के अंश चर्चा में है। इसके आधार पर योगी आदित्यनाथ की समाजसेवा दृष्टि का अनुमान लगाया जा सकता है। इसमें बताया गया कि मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ के पास उनकी सुविधा संबन्धी फॉइल पहुंची थी।इसमें उनसे अपने प्रयोग हेतु मन पसंद कार के लिए आदेश जारी करने का आग्रह किया गया था। बताया गया कि परम्परागत रूप से हर नया नया मुख्यमंत्री अपनी पसंद की गाड़ी आर्डर करता है। इसका भुगतान सरकारी कोष से किया जाता है। योगी जी ने कहा कि उनको नए वाहन की आवश्यकता नहीं है। जो कार पहले से उपलब्ध है,उसी का प्रयोग किया जाएगा। जबकि मायावती ने अपने लिए डेढ़ करोड़ की लैंड क्रूजर आर्डर की थी। अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री बनने के बाद इस कार के प्रयोग से इनकार कर दिया था। इसलिए उनके लिए साथ करोड़ रुपये लागत की मर्सेडीज एसयूवी आर्डर की गई थी। योगी आदित्यनाथ सन्यास धर्म की सादगी पर अमल करते है। वह अपने ऊपर न्यूनतम व्यय करना पसंद करते है। पांच बार सांसद रहने के बाद भी उनकी सादगी ईमानदारी पर अंशमात्र भी अंतर नहीं आया था। मुख्यमंत्री बनने के बाद भी वह इसी जीवनशैली पर अमल करते है। योगी जी ने कहा कि कर करदाताओं का धन बर्बाद करने नही बल्कि सेवा करने आये है। इसलिए पुरानी गाड़ियां ही प्रयोग में लाई जाएगी। लेकिन परम्परा के नाते मैं भी कुछ आर्डर करूँगा। मेरे लिए दो सौ रु का भगवा गमछा मेरी सीट के पीछे लगाया जाये। जो मुझे हमेशा याद दिलाता है कि भगवा त्याग और तपस्या का प्रतीक है।

शपथ ग्रहण समारोह में भी संत समाज को विशेष रूप में आमंत्रित किया गया था। इसमें अयोध्या मथुरा और काशी के सबसे अधिक संत उपस्थित रहे। सभी संतों ने योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री के रूप में दूसरे कार्यकाल की सफलता की कामना की है। अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेन्द्रानन्द सरस्वती ने कहा कि योगी आदित्यनाथ प्रदेश से भ्रष्टाचार और गुंडागर्दी को समाप्त किया। सबका साथ,सबका विकास के साथ सबका विश्वास भी जीता है। मथुरा के मौनी फलाहारी बापू ने कहा हम लोग योगी का साथ देते रहेंगे। अक्षय पात्र के स्वामी आनंद जी महाराज ने कहा कि योगी आदित्यनाथ जनता का विश्वास जीतकर दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर इतिहास रचने का काम किया है। दिगम्बर अखाड़ा अयोध्या के महंत सुरेश दास ने कहा कि संतों का आशीर्वाद है योगी राज का दूसरा कार्यकाल काफी बेहतर होगा। मुख्यमंत्री के रूप योगी आदित्यनाथ का कार्यकाल प्रेरणादायी है। कुशभवनपुर पीठाधीश्वर बाल स्वामी रामप्रपन्नाचार्य जी महाराज ने हिन्दुस्थान समाचार से कहा कि योगी जी संत है सम्पूर्ण संत समाज का उन्हें आशीर्वाद है।
जगद्गुरू रामदिनेशाचार्य ने कहा कि योगी आदित्यनाथ ने बिना भेदभाव के सबके लिए काम किया है जिसके कारण जनता ने दूसरी बार भाजपा को बहुमत दिया।मणिरामदास की छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास ने कहा कि पीएम मोदी व सीएम योगी के नेतृत्व में राष्ट्रमंदिर की परिकल्पना पिछले कुछ वर्षों में साकार होती दिखी है। सियाकिशोरी शरण महाराज अयोध्या के शिष्य बाल मुकुंद दास जी महाराज ने कहा कि योगी के शासन में सामाजिक समरसता को पुष्ट किया गया है।














