सलिल पांडेय, वरिष्ठ पत्रकार, मिर्जापुर.

 

1-श्री हनुमान पवन के 49 पुत्रों में प्राणवायु (ऑक्सीजन) हैं, जिसे पाने के लिए वर्तमान समय भागमभाग कर रहा है।

2-श्री हनुमान का सूर्य को निगलने का मतलब ही है कि सूर्य की ऊर्जा से तन-मन को ऊर्जान्वित करना।

3-सुबह उदित होने के समय बाल रूप सूर्य के सामने बैठकर तथा मुंह खोलते हुए जिह्वा बाहर कर सूर्य किरणों को कंठ में ले जाना चाहिए। यह ‘अस कहीं श्रीपति कंठ लगावें’ का रूप है।

4-हनुमान जी की मूर्ति को सिंदूर और चमेली या गुलरोगन तेल से चोला चढ़ाने का मतलब उपासक अपना चोला (शरीर) उत्तम कर रहा है न कि मूर्ति का।

5-सिंदूर में पारा है जो रक्त में हीमोग्लोबिन को बढ़ाता है तथा वायरस को नष्ट करता है।

6-पंच तत्वों का कर्ज जरूर अदा करना चाहिए। पृथ्वी के कर्ज के लिए वृक्ष लगाना, उसे सिंचित करना चाहिए। जल के लिए नदियों में मछलियों को चारा खिलाना चाहिए। मछलियां जल को शुद्ध करती हैं। अग्नि के कर्ज के लिए हवन करना तथा आकाश के कर्ज के लिए कम तथा धीमी आवाज में बोलना चाहिए।

7-भगवान हमारी सुनें तो हमें खुद भगवान की श्रेणी का बनना चाहिए। द्वार पर हमें कोई भगवान समझ कर मदद मांगने आया है तो सक्षम होते हुए उचित मांग मानने से इनकार नहीं करना चाहिए।

8- धर्मस्थलों को कमाई की दुकान की जगह सेवा केंद्र होना चाहिए।

9-पुजारी/मौलवी/पादरी भी मंदिर, मस्ज़िद, चर्च तथा गुरुद्वारे में आई सम्पत्ति का वितरण जरूरमंद को करें। केवल खुद का उपयोग अनिष्टकारक है। ऐसे स्थलों पर धन नहीं देना चाहिए।

10-कोरोना की भयावहता के दौर में धार्मिक स्थल, सामाजिक संगठन, राजनीतिक दल अपने भवनों का दरवाजा अभी तक नहीं खोल सके तो वह अनुचित है।

11-इस स्थिति में आम जनता से चंदा मांगने, आजादी के वक्त माताओं द्वारा आभूषण राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को देने की दुहाई व्यर्थ है।

12-निर्मल मन के बिना आध्यात्मिक शक्ति से प्रार्थना फलीभूत हो ही नहीं सकती ।

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