डॉ दिलीप अग्निहोत्री

 

केंद्र और प्रदेश की वर्तमान सरकार ने पर्यटन व तीर्थाटन को भी विकास की समग्र अवधारणा में जोड़ा है। इसके दृष्टिगत पर्यटन व तीर्थ स्थलों का विकास और इनसे संबंधित राजमार्ग का निर्मांण शामिल है। विगत वर्षों के दौरान इस दिशा में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसमें अनेक नए अध्याय जोड़े है। उन्होने अयोध्या जी में त्रेता युग जैसा दीपोत्सव का शुभारंभ किया था। शुभारंभ के बाद यह परम्परा के रूप में स्थापित हुआ। इसने क्रमशः अपने ही कीर्तिमानों को पीछे छोड़ा है। विश्व में दीपोत्सव का रिकॉर्ड कायम हुआ। इसी प्रकार योगी आदित्यनाथ ने वन महोत्सव का शुभारंभ किया था। जिसने अपने ही रिकार्ड को हर बार पीछे छोड़ा है। अब योगी आदित्यनाथ रामवन गमन मार्ग को वन महोत्सव अभियान में शामिल करने का अभिनव कार्य करेंगे। इसके अंतर्गत इस मार्ग पर त्रेता युग कालीन वाटिकाओं की स्थापना होगी। भारत में आदि काल से प्रकृति संरक्षण का विचार रहा है। योगी आदित्यनाथ उससे प्रेरणा लेते है। उनका मानना है कि अतीत से जुड़ना वर्तमान समाज के लिए आवश्यक है। त्रेता युग की वाटिका व उपवन भी वर्तमान पीढ़ी में पर्यावरण चेतना का संचार करेंगी। महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण में अयोध्या से चित्रकूट तक राम वन गमन मार्ग में मिलने वाली अट्ठासी वृक्ष प्रजातियों एवं वनों एवं वृक्षों के समूह का उल्लेख है। महर्षि वाल्मीकि कृत रामायण एवं विभिन्न शास्त्रों में श्रृंगार वन,तमाल वन, रसाल वन,चम्पक वन, चन्दन वन,अशोक वन, कदम्ब वन,अनंग वन, विचित्र वन, विहार वन का उल्लेख मिलता है।

रामायण में उल्लिखित अट्ठासी वृक्ष प्रजातियों में से कई विलुप्त हो चुकी हैं अथवा देश के अन्य भागों तक सीमित हो गई हैं। यथा रामायण में उल्लिखित रक्त चन्दन के वृक्ष वर्तमान में दक्षिण भारत तक सीमित हैं। वन विभाग द्वारा राम वन गमन मार्ग में पड़ने वाले जनपदों अयोध्या,प्रयागराज चित्रकूट में रामायण में उल्लिखित अट्ठासी वृक्ष प्रजातियों में से प्रदेश की मृदा, पर्यावरण व जलवायु के अनुकूल तीस वृक्ष प्रजातियों का रोपण कराया जा रहा है। यह वृक्ष प्रजातियां-साल, आम,अशोक,कल्पवृक्ष पारिजात, बरगद, महुआ,कटहल,असन, कदम्ब,अर्जुन,छितवन, जामुन,अनार,बेल,खैर, पलाश,बहेड़ा,पीपल, आंवला,नीम,शीशम, बांस,बेर,कचनार, चिलबिल,कनेर,सेमल, सिरस,अमलतास, बड़हल हैं। इन जनपदों में इन वृक्षों के रोपण की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। राज्य सरकार ने व्यापक जनसहभागिता से इस वर्ष तीस करोड़ पौधरोपण का लक्ष्य रखा है। इसके तहत राम वन गमन मार्ग पर आस पास की ग्राम सभाओं की भागीदारी से रामायणकालीन वृक्षों का रोपण कराया जाएगा।

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