अमित मिश्रा ( मुम्बई ब्यूरो चीफ़)

“हम अपनी लगन और मेहनत से जो कुछ भी पाना चाहते हैं, वह पा सकते हैं” यह कहना है सोनी सब के शो ‘काटेलाल एण्ड संस’ की मेघा चक्रवर्ती का। उनसे हुई बातचीत में उन्होंने खुलकर अपनी बात रखी । प्रस्तुत है उस बातचीत के प्रमुख अंश…

*   ‘काटेलाल एण्ड संस’ शो में शामिल होने की क्या वजहें रहीं और सोनी सब के साथ जुड़कर कैसा महसूस हो रहा है ?

– ‘काटेलाल एण्ड संस’ को स्वीकार करने का सबसे बड़ा कारण यह था कि मुझे कुछ नया करने का अवसर मिला। यह सामान्य डेली सोप से बिलकुल अलग है। यह शो और किरदार भी मेरे लिए एक चुनौती था क्योंकि गरिमा के किरदार को अच्छी तरह से निभाने के लिए बहुत सी चीज़ें सीखनी थी। ‘काटेलाल एण्ड संस’ बहुत ही मजबूत किरदारों को लेकर आ रहा है और लड़कों का रूप धारण करके कैसे हम  सलून को बचा रही हैं उनके इस सफर को दर्शा रहा है। जिस चीज़ ने एक कलाकार के तौर पर सबसे ज़्यादा मुझे उत्साहित किया, वो थी इस किरदार की बुद्धिमता और किसी भी रूढ़िवादी चुनौती का बिना डरे सामना करना। एक प्रेरणादायक शो ‘काटेलाल एण्ड संस’ के लिए सोनी सब के साथ जुड़ने का अनुभव अब तक शानदार रहा है।

*    शो का कॉन्‍सेप्ट बहुत ही प्रेरित करने वाला है, इसके बारे में कुछ और भी शेयर करें।

– यह शो जेंडर रोल की रूढ़िवादी सोच को दर्शाता है जो कि हमारे समाज में लोगों के दिमाग में गहराई तक बसा हुआ है। ‘कांटेलाल एण्ड संस’ इस चीज़ और तथ्य को सामने रखता है कि कोई भी ऐसा टास्क और कॅरियर नहीं है जिसमें महिलाएं आगे नहीं बढ़ सकती और सपनों का कोई जेंडर नहीं होता। गरिमा और सुशीला की तरह, जो अपने पिता के इस विश्वास के बावजूद भी कि महिलाएं हेयर ड्रेसर नहीं बन सकती और वह पुरुषों का सैलून नहीं चला सकती, उन्होंने अपनी क्षमताओं को साबित किया और सैलून को चलाकर और अपने परिवार का सहयोग करके उनकी महत्वकांक्षाओं को पूरा करने के लिए हमेशा तत्पर रहीं।

*  गरिमा के बारे में सबसे खास क्या है ? अपने किरदार के बारे में हमारे साथ कुछ शेयर करें।

– गरिमा अपने ‘पापा की परी’ है। वह बबली, बुद्धिमान और दोनों बेटियों में से ज़्यादा ज़िम्मेदार है। गरिमा और सुशीला के पिता धरमपाल ठाकुर के अनुसार, गरिमा उनकी इच्छाओं को सुनती है और उसका पालन करती है। वह हर स्थिति को बहुत ही शांति से संभालती है और वह कठिन से कठिन स्थिति से खुद को निकालना जानती है। गरिमा अपनी किसी भी समस्या से निकलने के लिए अपने गुस्से का इस्तेमाल करने में विश्वास नहीं रखती, इसके बजाय वह बात करके किसी भी स्थिति से बाहर निकलती है। गरिमा अपनी गर्म दिमाग वाली बहन सुशीला की तुलना में शांत और सुलझी हुई है।

*    ‘सपनों का कोई जेंडर नहीं होता’- आपका इस मुहावरे पर क्या कहना है ?

– जब मैंने यह स्क्रिप्ट पढ़ी तो मुझे यह वाक्‍य बहुत ही अच्छा लगा और इसने मुझे सच में बहुत प्रेरित किया। ‘कांटेलाल एण्ड संस’ इस सवाल को सबके सामने खड़ा करता है- क्या ज़िंदगी में सपनों को कभी भी जेंडर के द्वारा प्रतिबंधित किया जाना चाहिए? उदाहरण के तौर पर जैसे, एक महिला एक बहुत अच्छी नाई हो सकती है, जबकि एक पुरुष शेफ बनकर और पूरे घर के लिए एक बहुत ही अच्छा भोजन बनाकर तैयार कर सकता है। मैं उम्मीद करती हूं कि हमारा शो लोगों को सपने देखने और उनको पूरा करने के लिए कदम आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करता रहे।

*    जब आप बड़ी हो रहीं थी तो आपका सपना क्या था ? क्या आपके परिवार ने आपका सहयोग किया ?

– मैं हमेशा से डांस करना चाहती थी और मैं डांसर बनी। मैंने कथक डांस में प्रशिक्षण लिया है लेकिन बड़े होते हुए अपनी पढ़ाई पर ध्यान देने की वजह से मैं इसे पूरा नहीं कर पाई। मैंने वास्तव में कभी भी एक्ट्रेस बनने का सपना नहीं देखा लेकिन जब मैंने पहली बार एक्टिंग में अपना हाथ आज़माया और यह मुझे एक्टर बनने के इस रास्ते पर लेकर आया। मेरे परिवार ने भी मेरा पूरा समर्थन किया। अगर वह मेरा सहयोग नहीं करते तो मैं मुंबई में नहीं होती। उन्होंने पहले दिन से मुझे अपना पूरा सहयोग दिया है और यह सोचे बिना कि मैं मुंबई में खुद कोई भी काम करने में सक्षम नहीं हूं। उन्होंने ज़िंदगी में मेरे द्वारा किए गए हर प्रयास पर पूरा भरोसा रखा है।

*    क्या आप अपने गरिमा के किरदार से मेल खाती हैं?

– हां, कई जगहों पर। गरिमा बिलकुल मेरी तरह है जिसे लगता है कि किसी भी स्थिति को अच्छी बातचीत से सुलझाया जा सकता है। मुझे लगता है कि कोई भी समस्या हल हो सकती है अगर लोग शांति से बातचीत करे। मैं गरिमा की तरह ही बबली और बातचीत में आगे हूं। एक विशेषता जिसमें मैं गरिमा से पूरी तरह अलग हूं वो है कि उसे अच्छी पोशाक पहनकर तैयार होना बहुत पसंद है। और मैं ऐसा लुक पसंद करती हूं जो न्यूट्रल और नैचुरल हो।

*    क्या आपने अपने डायलॉग्स पर भी काम किया था ? यह कितना मुश्किल  आसान रहा ?

– डायलॉग बोलने में महारथ हासिल करना शो के बारे में सबसे ज़्यादा मुश्किल हिस्सा था। यह मेरा 5 वां शो है और इससे पहले मैंने जो शो किए हैं वो हिंदी या यूपी बेस  है। इसलिए, मुझे किसी भी तरह की दिक्कत नहीं हुई। मुझे शुरुआत में हिंदी के साथ थोड़ी दिक्कत हुई थी लेकिन अंततः मैंने भाषा पर अपनी अच्छी पकड़ बना ली, अब मैं हरियाणवी बोली पर पकड़ बनाने के लिए संघर्ष कर रही हूं। बंगाली होने के नाते, जहां मुझे लगातार अपनी हिंदी पर पकड़ बनाकर रखने की ज़रूरत है, मुझे अब इसमें हरियाणवी भाषा के सार को भी शामिल करना है जो कि मेरे लिए थोड़ा चुनौतीपूर्ण है।

*   ‘काटेलाल एण्ड संस’ के लिए शूटिंग करने का अनुभव कैसा रहा है ?

मेरे लिए यह अनुभव बिलकुल ही नया है। मैं एक साल के बाद कोई शो कर रही हूं और आमतौर पर मुझे बहुत ही मज़ा आ रहा है। मैं बहुत खुश हूं कि मेरे किरदार का लुक बहुत ही अनोखा है और मेरे प्रशंसकों और दोस्तों को मुझे ऐसे अवतार में देखने का मौका मिलेगा जिसमें उन्होंने मुझे पहले कभी नहीं देखा। मैं एक ऐसे किरदार में नज़र आऊंगी जिसके बारे में कभी किसी ने नहीं सोचा होगा कि मैं निभा पाऊंगी।

16 नवंबर से शुरू हो रहे इस शो ‘काटेलाल एण्ड संस’ को हर सोमवार से शुक्रवार रात 7:30 बजे  सोनी सब पर देखा जा सकता है।

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