डॉ आलोक चान्टिया, अखिल भारतीय अधिकार संगठन
मुझको मालूम है जिस देश में भगवान जन्म लेते हो जो धरती भगवान की सबसे प्रिय हो वहां पर भगवान को लावारिस कहने पर तलवारें खिंच जाएंगी क्योंकि आपके रहते हुए भला भगवान लावारिस कैसे हो सकता है पर क्या लावारिस किसको कहते है ये आपको मालूम है ये जान कर काफी ख़ुशी हुई पर आपको ये कब पता चला कि आप भगवान् के माँ बाप नहीं है वैसे ये सच आपको पता है ये जान कर ख़ुशी हुई और लगा कि कही तो आप अपने को किसी से छोटा मानते है ( वैसे तो अपनी हैसियत का गाना गाने से आपको फुर्सत नहीं इसी में हर तीसरा आदमी मानसिक रोगी हो गया है ) पर भगवान् को लावारिस समझा वो भी ठीक है लेकिन उसको अनचाहे गर्भ की तरह सड़क , पार्क , पेड़ के नीचे आप फेक आते है ये समझ में नहीं आया !!!!!!!!!!!!
वैसे आप आप भगवान को कोई वस्तु नहीं समझते और ना ही भगवान को लेकर आप स्वार्थी हैं जो जब तक काम था तब तक अपने घर पर रखा और जब काम निकल गया तो लात मार के बाहर हर गली चौराहे के पेड़ के नीचे मंदिरों के किनारे सड़कों के डिवाइडर रोड पर रखे भगवान किसकी बाट जोह रहे हैं मुझे डर लग रहा है और लगी भी क्यों ना ओह हो बच्चे भी तो भवान की मूरत होते है और जब आप बच्चे को यूँ ही अनचाहा गर्भ कहकर यहाँ वहां फेंक आते है तो फिर भगवान् का ये हाल तो होना ही था काश भगवान् को ये पता होता कि उसको आदमियों के बीच रहकर लावारिस होने का दर्द सहना पड़ेगा चलो आदमी बनने का जब शौक है तो झेलो भगवान् लावारिस होने का मजा वैस भगवान एक बात तो बता दो आप को कैसा लगा लावारिस की तरह सड़क , पेड़ , पार्क में पड़े रहकर …………..आखिर आदमी के बीच रहकर ये तो होना ही था शायद भगवान भी कहता हूं अब पछताए होत का जब चिड़िया चुग गई खेत इतनी दूर तक आदमी को बनाते समय भगवान ने भी नहीं सोचा होगा तो भगवान अब उठाइए अकेलेपन का दर्द उपेक्षा का दर्द आखिर आपने ही तो दुनिया की सबसे सुंदर तम कृति आदमी को बनाया है तो आगे आगे देखिए होता है क्या अली जी आपके सामने अभी अभी कोई नाली में एक अनचाहा गर्भ फेक गया है मतलब समझ रहे हैं ना (बच्चे तो भगवान की मूरत होते हैं)
अखिल भारतीय अधिकार संगठनl















