सत्यम सिंह ठाकुर, गुजरात
- 20अप्रैल यानि की आज स्पेशल कोर्ट 2002 के सांप्रदायिक दंगों के दौरान अहमदाबाद के नरोडा गाम इलाके में 11 लोगों की हत्य्रा के मामले में फैसला सुनाएगी
- इस दौरान आरोपियों को अदालत में मौजूद रहने का निर्देश दिया गया है ।
पिछले सप्ताह ही इस मामले में अदालत ने सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रखा था।वर्ष 2002 के गुजरात दंगों को लेकर सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित एसआईटी का यह 9वां मामला है। इस मामले के आरोपियों में राज्य की पूर्व मंत्री माया कोडनानी और बजरंग दल के पूर्व नेता बाबू बजरंगी भी शामिल हैं। इस मामले में कुल 86 आरोपी थे, लेकिन उनमें से 10 लोगों की सुनवाई के दौरान मौत हो गई।
गोधरा में ट्रेन आगजनी की घटना में अयोध्या से लौट रहे 58 यात्रियों की मौत के एक दिन बाद 28 फरवरी, 2002 को अहमदाबाद शहर के नरोडा गाम इलाके में दंगों के दौरान 11 लोग मारे गए थे। आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 302 (हत्या), 307 (हत्या का प्रयास), 143 (गैरकानूनी जमावड़ा), 147 (दंगा), 148 (घातक हथियारों से लैस होकर दंगा करना), 129 बी (आपराधिक साजिश) के तहत मुकदमा चला। अभियोजन पक्ष ने जहां 187 वहीं बचाव पक्ष ने इस मामले में 57 गवाहों का परीक्षण किया। जुलाई 2009 में शुरु हुआ इस मुक़दमे में करीब 14 साल बाद अब फैसला आने जा रहा है।
इस मामले में एक स्टिंग ऑपरेशन से बाबू बजरंगी का नाम सामने आया था। उनका असली नाम बाबू भाई पटेल है। उस वक्त बाबू बजरंगी बजरंग दल से जुड़े हुए थे। बाद में वह विहिप और शिवसेना में शामिल हो गए थे। स्टिंग ऑपरेशन में बाबू बजरंगी वीर महाराणा प्रताप जैसा कुछ काम करने की बात कहते नज़र आये थे ,स्टिंग में बजरंगी ने यह भी स्वीकार किया था कि दंगे के वक्त नरोडा में मौजूद थे। बजरंगी को 2019 के मार्च में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली थी।















