जितेंद्र सिंह भदौरिया, गुजरात
कही मशाल गरबा और अंगार तो कही गरबे में तलवार
गुजरात का गरबा भले ही ग्लोबल हो चूका हो मगर अभी भी कई जगह पारम्परिक और सांस्कृतिक गरबों का खास महत्त्व है। आज बात राजकोट के राजपूतानियो की तलवार रास की । ग्रीनिज बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में जगह बना चुकी तलवार रास में राजपूत महिलाओ की तलवार बाजी देख अच्छे अच्छे दंग रह जाते है।

नवरात्रि के मौके पर राजकोट के राज परिवार द्वारा रंजीत विलास पैलेस में शौर्य गरबा का आयोजन कराया जाता है भगिनी सेवा फाउंडेशन द्वारा आयोजित शौर्य रास में 16 साल से लेकर 45 साल की सैकड़ो महिलाओं ने तलवार लेकर गरबा किया और शक्ति की आराधना करती है। इस तलवार गरबा रास की प्रैक्टिस डेढ़ से 2 महीने तक की जाती है

वही जामनगर में मशाल गरबा और अंगार रास को देखने भी लोग दूर दूर से आते है , पटेल युवक ८० सालो से हाथो में मशाल लेकर कठिवादी परिधान में गरबा खेलते है और फिर शक्ति की आराधना करते हुए अंगारो पर रास रचाते है।

नवरात्र के मौके पर नेता और अभिनेता भी गरबे के जादू से अछूते नहीं है ,आयुष्मान खुराना वरुण धवन , कंगना राणावत सहित कई फ़िल्मी सितारे गरबा इवेंट में हाजिरी दे चुके है वही मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल रोज किसी न किसी गरबा ग्राउंड में जरूर पहुंचते है ,राज्य के केबिनेट शिक्षा मंत्री कुबेर डिंडोर ने भी अपने पैतृक निवास स्थान भंडारा में आयोजित गरबे में कदम ताल मिलाते नज़र आये , वही गुजरात दौरे पर आये केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री भी गरबा देखने से खुद को नहीं रोक पाए।
कुल मिलाकर नवरात्र में गुजरात और गरबा एक दूसरे का पर्याय बने हुए है कही आधुनिक गरबे की धमाल है तो कही पारम्परिक और सांस्कृतिक गरबे की बोलबाला
















