Home Uncategorized प्रो. आभा अवस्थी की स्मृति में “भारतीय ज्ञान परंपरा एवं आधुनिकता” विषय...

प्रो. आभा अवस्थी की स्मृति में “भारतीय ज्ञान परंपरा एवं आधुनिकता” विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन

0
9

लखनऊ, 13 अक्टूबर 2026। लखनऊ विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग द्वारा डॉ. गिरि लाल गुप्ता इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक हेल्थ एवं डॉ. राम मनोहर लोहिया शोध पीठ के सहयोग से प्रो. आभा अवस्थी की स्मृति में “भारतीय ज्ञान परंपरा एवं आधुनिकता” विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन डी.पी. मुखर्जी सभागार में किया गया। कार्यक्रम में लखनऊ विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. जे.पी. सैनी तथा मुख्य अतिथि एवं उत्तर प्रदेश की माननीय उच्च शिक्षा राज्यमंत्री श्रीमती रजनी तिवारी, सहित अनेक शिक्षाविद् एवं गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। अतिथियों का शॉल एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मान किया गया। इस अवसर पर जे.आर.एफ. शोधार्थियों को पदक प्रदान कर सम्मानित भी किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ समाजशास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रो. प्रमोद कुमार गुप्ता के स्वागत वक्तव्य से हुआ। इसके पश्चात प्रो. अर्चना वर्मा ने प्रो. आभा अवस्थी के स्मृति-साइटेशन का वाचन किया। संगोष्ठी के सफल आयोजन में विशेष सहयोग के लिए श्री सुदर्शन लालम के प्रति आभार व्यक्त किया गया।

संगोष्ठी के शैक्षणिक सत्र में मुख्य वक्ता प्रो. मनोज जेना ने ज्ञान प्रणाली के डीओपिनियनीकरण के विषय पर अपने विचार प्रस्तुत करते हुए ज्ञान के प्रचलित स्वरूपों, ओपिनिवेशिक प्रभावों तथा भारतीय ज्ञान परंपरा के पुनर्मूल्यांकन की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। विशिष्ट अतिथि प्रो. जया श्रीवास्तव ने प्रो. आभा अवस्थी से जुड़ी स्मृतियों को साझा करते हुए ज्ञान के स्वदेशीकरण की आवश्यकता पर बल दिया। इसी क्रम में प्रो. नीतू सिंह ने विश्व सभ्यता के विकास में भारतीय ज्ञान परंपरा के महत्वपूर्ण योगदान को रेखांकित किया । उन्होंने भारतीय ज्ञान की समृद्ध विरासत और उसकी समकालीन प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। प्रो. ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने वैदिक काल में महिलाओं की स्थिति को बेहतर बताया। वहीं, प्रो. सत्येंद्र त्रिपाठी ने हार्वर्ड, शिकागो, बॉम्बे एवं लखनऊ सहित विभिन्न शैक्षणिक केंद्रों तथा उनसे जुड़ी विचारधाराओं के योगदान पर चर्चा की। इन विचार-विमर्शों के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा, आधुनिकता और ज्ञान के विविध दृष्टिकोणों के बीच संबंधों को समझने का प्रयास किया गया।

कार्यक्रम का समापन प्रो. जय शंकर पाण्डेय के धन्यवाद ज्ञापन एवं राष्ट्रगान के साथ हुआ।

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here