सत्यम सिंह ठाकुर, गुजरात
हर साल की तरह इस साल भी गुजरात के गांधीनगर स्थित रुपाल में लाखों किलो घी सड़कों पर बह गया।
दरअसल रूपल गांव में वरदायिनी माता के मन्दिर की हर साल पालकी यानी की पल्ली निकलती है जिसमे माता की ज्योत पर करोड़ो का घी चढ़ाया जाता है साथ ही इस जलती हुई पल्ली में लोग अपने बच्चों को ज्योंत के दर्शन कराके धन्य मानते हैं। लाखों की संख्या में लोग माता की इस पल्ली में हिस्सा लेते हैं। गुजरात के लोगों में माता की इस पल्ली की खास मान्यता है। माता की ज्योंत को घी से नहलाया जाता है। उसके बाद नवजात बच्चे को लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य के लिए उस ज्योंत का स्पर्श कराया जाता है।

इस साल भी यहां करीब 30 करोड़ का घी माँ की ज्योत पर चडाया गया जो सड़कों पर बहकर गांव के बाहर निकला जिसे लोग माता का प्रसाद और आशीर्वाद मानते है ,ये बात और है कि इस प्रसाद को सड़कों से उठाकर सिर्फ वाल्मीकि समाज के लोग ही ले जाते हैं।

बताया जाता है कि रुपाल में यह पल्ली की परम्परा 5000 साल से चली आ रही है। कहा जाता है कि यह परम्परा पांडवों ने शुरू की थी। मान्यता है कि उनका गुप्त वास यहां से शुरू हुआ था। यहां पर पांडवों ने पंच पल्ली यज्ञ किया था, तभी से ये रस्म चली आ रही है।















